Maintenance Case में पति को कितना देना पड़ता है?
Maintenance (गुजारा भत्ता) से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भारत में Criminal Procedure Code (CrPC) की धारा 125 और Hindu Marriage Act, 1955 (Section 24 & 25) के तहत निर्धारित होती है। इसमें पत्नी, बच्चे और वृद्ध माता-पिता अपने भरण-पोषण के लिए पति से आर्थिक सहायता की मांग कर सकते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि Maintenance की राशि कितनी होती है और इसे किन कारकों के आधार पर तय किया जाता है।
Maintenance Case में पति को कितना देना पड़ता है?
1. CrPC धारा 125 के तहत Maintenance
CrPC की धारा 125 के अनुसार, यदि कोई पति अपनी पत्नी, नाबालिग बच्चों या वृद्ध माता-पिता की आर्थिक देखभाल करने में असमर्थ है, तो वह कोर्ट में Maintenance का दावा कर सकते हैं।
- यह हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और अन्य धर्मों के सभी व्यक्तियों पर लागू होता है।
- Maintenance की राशि तय करते समय पति की आय, पत्नी की आर्थिक स्थिति, जीवनशैली और अन्य आवश्यक खर्चों को ध्यान में रखा जाता है।
2. Maintenance की राशि कैसे तय होती है?
कोई निश्चित राशि निर्धारित नहीं है, लेकिन सामान्यत: यह पति की मासिक आय का 25-50% हो सकती है। Maintenance की गणना निम्नलिखित कारकों के आधार पर होती है:
- पति की मासिक आय – वेतन, व्यापार, किराए, निवेश आदि से होने वाली आय।
- पत्नी की आय – यदि पत्नी खुद कमाती है, तो Maintenance की राशि कम हो सकती है।
- जीवन स्तर – शादी के दौरान पत्नी किस तरह के जीवन स्तर का आदी थी।
- बच्चों की जिम्मेदारी – यदि बच्चे पत्नी के साथ रहते हैं, तो उनके लिए अतिरिक्त Maintenance मिल सकता है।
- पति की अन्य जिम्मेदारियां – यदि पति के अन्य परिवार के सदस्य हैं, तो इसे भी ध्यान में रखा जाता है।
3. Hindu Marriage Act के तहत Maintenance (धारा 24 और 25)
- धारा 24: जब Maintenance का केस चल रहा हो, तो पत्नी केस के दौरान अंतरिम Maintenance मांग सकती है।
- धारा 25: कोर्ट द्वारा तलाक के बाद पत्नी को एकमुश्त या मासिक आधार पर स्थायी Maintenance दिया जा सकता है।
4. मुस्लिम पर्सनल लॉ में Maintenance (शरिया कानून)
- Shah Bano केस (1985) के बाद, मुस्लिम महिलाओं को Iddat अवधि के बाद भी Maintenance का हक दिया गया।
- मुस्लिम महिला Muslim Women (Protection of Rights on Divorce) Act, 1986 के तहत गुजारा भत्ता मांग सकती है।
5. Maintenance से जुड़े महत्वपूर्ण कोर्ट के फैसले
- Kusum Sharma vs. Mahinder Kumar Sharma (2020): सुप्रीम कोर्ट ने Maintenance की राशि तय करने के लिए गाइडलाइंस दीं।
- Rajnesh vs. Neha (2020): दोनों पक्षों को अपनी आय और खर्चों की जानकारी देना जरूरी बताया गया।
Maintenance से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
✔ यदि पत्नी कामकाजी है और पर्याप्त आय कमा रही है, तो Maintenance कम या नहीं दिया जा सकता।
✔ दूसरी शादी करने पर पत्नी को Maintenance नहीं मिलेगा।
✔ यदि पत्नी ने गलत आरोप लगाए हैं या पति को प्रताड़ित किया है, तो Maintenance से वंचित किया जा सकता है।
✔ Maintenance एकमुश्त (One-time settlement) या मासिक (Monthly) आधार पर दिया जा सकता है।
